RBI: आरबीआई ने दे दी सख्त चेतावनी, अगर बैंकों ने किया यह काम तो लिया जाएगा बड़ा एक्शन
Bank News: मिस सेलिंग का अर्थ है जब बैंकों या वित्तीय संस्थानों द्वारा ग्राहकों को ऐसे उत्पाद बेच दिए जाते हैं, जो उनकी जरूरत के अनुरूप नहीं होते। जैसे बीमा पॉलिसी को फिक्स्ड डिपॉजिट बताकर बेचना, वरिष्ठ नागरिकों को जटिल निवेश योजनाएं देना, या ग्राहकों को बिना जानकारी के उच्च शुल्क वाली सेवाएं देना।

RBI: मिस सेलिंग का अर्थ है जब बैंकों या वित्तीय संस्थानों द्वारा ग्राहकों को ऐसे उत्पाद बेच दिए जाते हैं, जो उनकी जरूरत के अनुरूप नहीं होते। जैसे बीमा पॉलिसी को फिक्स्ड डिपॉजिट बताकर बेचना, वरिष्ठ नागरिकों को जटिल निवेश योजनाएं देना, या ग्राहकों को बिना जानकारी के उच्च शुल्क वाली सेवाएं देना।
डिप्टी गवर्नर एम. राजेश्वर राव बोले…
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के डिप्टी गवर्नर एम. राजेश्वर राव ने हाल ही में इस पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि ये प्रथाएं खासकर निम्न आय वर्ग के लोगों और कम वित्तीय साक्षरता वाले नागरिकों के लिए घातक हैं। आरबीआई ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों द्वारा वित्तीय उत्पादों की बार-बार गलत बिक्री पर चिंता जताई है। आरबीआई विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों और कम वित्तीय साक्षरता वाले लोगों को जटिल या अनावश्यक निवेश उत्पाद बेचने के बारे में चिंतित है, जिन्हें आमतौर पर सावधि जमा या बीमा के नाम पर बेचा जाता है।
RBI ने दे दी चेतावनी

राव ने मुंबई में एक वित्तीय समावेशन कार्यक्रम में कहा कि माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र में कई चुनौतियां हैं जैसे अत्यधिक कर्ज, उच्च ब्याज दरें और सख्त वसूली प्रथाएं। हाल के महीनों में, माइक्रोफाइनेंस ऋण पर ब्याज दरों में थोड़ी कमी आई है, लेकिन उच्च ब्याज दरों और उच्च मुनाफे का चलन जारी है। कुछ माइक्रोफाइनेंस ऋणदाता सस्ते फंड विकल्प होने के बावजूद बहुत अधिक ब्याज दर वसूलते हैं। यह अनुचित है।
लगा दी RBI ने यह रोक
राव ने कहा कि हाल के दिनों में उच्च ब्याज दरों और सख्त वसूली के कारण माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र में कई दुखद घटनाएं हुई हैं। उन्होंने सभी हितधारकों से ऐसी समस्याओं को पहले से ही रोकने का आग्रह किया। उन्होंने ऋणदाताओं से वसूली में अनैतिक तरीके न अपनाने और जिम्मेदार और टिकाऊ तरीके से वित्तीय सेवाएं प्रदान करने का आग्रह किया। राव ने कहा कि माइक्रोफाइनेंस मॉडल भले ही मजबूत हो, लेकिन इसकी संरचना और प्रोत्साहन योजना में खामियां ग्राहकों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। उन्होंने कहा कि मॉडल की समीक्षा की जानी चाहिए।
RBI ने जताई चिंता

राव ने ऋण देने वाले बैंकों और वित्तीय संस्थानों से आग्रह किया कि वे माइक्रोफाइनेंस को केवल उच्च-लाभ वाले व्यवसाय के रूप में न देखें, बल्कि इसे संवेदनशील और विकासात्मक दृष्टिकोण से देखें। उन्होंने कहा कि माइक्रोफाइनेंस संस्थान अक्सर पारंपरिक बैंकों की तुलना में अधिक ब्याज दर (20% से 28% प्रति वर्ष) लेते हैं, जो चिंता का विषय है। वहीं, वित्तीय संस्थानों का कहना है कि दूरदराज के इलाकों में खर्च और जोखिम के कारण ये दरें अधिक हैं।












